हिन्दी – भारत की राष्ट्रभाषा | National Language of India – Hindi (300 Words)

भारत एक विशाल देश है। यहाँ कई संस्कृतियाँ, धर्म और भाषायें हैं। इन विविधताओं में भी एकता कायम रहती है। ब्रिटीश-शासन काल में सब काम अंग्रेज़ी में होता था। भारत में स्वतंत्रता-संग्राम के आन्दोलन के साथ ही राष्ट्रभाषा की समस्या भी उठी थी। राष्ट्र की जनता में एक भावात्मक एकता स्थापित करने की सर्वमान्य भाषा है राष्ट्रभाषा। भारत के प्रान्त-प्रान्त में | अलग-अलग भाषायें बोली जाती हैं। महात्मागाँधी ने हिन्दी को | राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाने केलिए आह्वान किया था।

हिन्दी भारत की अधिकांश जनता की भाषा है। इस भाषा को बोलने और समझनेवालों की संख्या सब से अधिक है। इसलिए भारत की राष्ट्रभाषा बनने की योग्यता हिन्दी में है। हिन्दी बडी सरल भाषा है जिससे इसे सीखने में विशेष असुविधा नहीं होती। हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। देश की अखण्डता को सुरक्षित करने के महान उद्देश्य से 14 नवंबर 1949 को भारत के संविधान में राजभाषा के पद पर हिन्दी को चुना था।

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प्राचीन काल में संस्कृत को देश की राष्ट्रभाषा होने का गौरव प्राप्त था। अंग्रेज़ी एक समृद्ध भाषा है। लेकिन अंग्रेज़ी के माध्यम से जनता को जागृत नहीं कर सकते। हमारी परम्परा और संस्कृति अंग्रेज़ी के माध्यम से कभी प्रकट नहीं हो सकती। भारतवर्ष सदियों तक अंग्रेज़ों और अन्य विदेशियों का गुलाम रहा। विभिन्न विदेशी शासकों ने अपने देश की भाषा के माध्यम से शासन-कार्यों को संचालित किया। स्वतंत्रता के पूर्व अंग्रेज़ी शासन काल में समस्त कार्य अंग्रेज़ी में ही संपन्न होते थे लेकिन स्वतन्त्र हो जाने के बाद अंग्रेजी के द्वारा शासन के कार्यों का संचालन अत्यन्त ही लज्जा का विषय है।

राष्ट्रीय भावना और राष्ट्रीय एकता की स्थापना केलिए भारत को एक राष्ट्रभाषा बहुत ज़रूरी है। राष्ट्रीय भाषा के पद पर आरूढ होने हेतु हिन्दी को ही उपयुक्तता प्रदान की गई है। राष्ट्रभाषा बनने की विशेष गुण हिन्दी में निमग्न हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की अपेक्षा हिन्दी सरल एवं सुगम है। इसे सीखने में थोडे ही परिश्रम की आवश्यकता पडती है। हिन्दी भाषा की लिपि पूर्ण वैज्ञानिक है। हिन्दी भाषा को बोलनेवालों की संख्या सर्वाधिक है, लेकिन उनको समझनेवाले बोलनेवालों से भी अधिक हैं। संख्या लगभग चालीस प्रतिशत थी।

देश के बहुसंख्यक मनुष्यों की भाषा होने के कारण हिन्दी का दायित्व सर्वाधिक है। इसलिए हमें देश में हिन्दी के प्रचार केलिए उचित वातावरण की सृष्टि करनी चाहिए। केन्द्रीय सरकारी कार्य भी राष्ट्रभाषा में होता रहता है।